आध्यात्मिक विचारयन्त्र-मंत्र-तंत्र

धनवान कैसे बने ?, कनकधारा यन्त्र के चमत्कार, अनुभूत प्रयोग

धनवान कैसे बने

धनवान बनना प्रत्येक व्यक्ति का हक़ है | प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि वह आर्थिक रूप से सम्पन्न हो | वह उसके लिए प्रयत्न भी करता है परन्तु सभी धनवान नहीं बन पाते है |

धनवान कैसे बने

हमारे शास्त्रों में धनवान बनने के लिए बहुत मंत्र-तंत्र प्रयोग एवं अनुष्ठान दिए गए है | प्रत्येक व्यक्ति उन उपायों को करता है परन्तु उसे इच्छानुसार सफलता नहीं मिलती है |
मेरा मानना है कि यदि देवीय सहायता मिले तो व्यक्ति कम मेहनत से भी धनवान बन सकता है | हम सभी जानते है कि धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी देवी कि आराधना करनी चाहिए |
व्यक्ति आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के लिए अनुष्ठान करता है परन्तु उसका विधि-विधान जटिल होने से वह उसमे सफलता प्राप्त नहीं कर सकता |

कनकधारा यन्त्र के चमत्कार

मेरा ये मानना है कि धनवान बनने के लिए अर्थात लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने के लिए जितने भी प्रयोग है उनमे कनकधारा साधना शीघ्र फल देने वाली है |
यदि कनकधारा यन्त्र के सामने कनकधारा स्रोत का पाठ किया जाए तो कुछ ही दिनों में व्यक्ति आर्थिक रूप से सम्पन्न होने लगता है अर्थात इस स्रोत का पाठ करने वाले कि तरफ धन आकर्षित होने लगता है |
कनकधारा यन्त्र स्वतः सिद्ध है अतः इसके सामने ज्यादा विधि-विधान करने कि आवश्यकता नहीं होती है केवल आपको कनकधारा यन्त्र बुधवार या शुक्रवार के दिन लाभ चौघड़िए में घर में स्थापित कर देना है| यन्त्र स्तापित करो उस दिन आपका चौथा, आठवा या बारहवा चन्द्रमा नहीं होना चाहिए | यन्त्र स्थापित करने के बाद इसके सामने दीपक एवं दो अगरबत्ती को जलाया जाए फिर इस यन्त्र के ऊपर द्रष्टि डालते हुए चौबीस जानते में एक बार स्नान करके कनकधारा स्रोत का पाठ करना है |
यदि आपको घर से बहार जाना पड़े तो घर का कोई भी सदस्य यन्त्र के सामने दीपक व अगरबत्ती जला सकता है तथा आप जहा हो वहा कनकधारा स्रोत का पाठ कर सकते है |
कुछ दिनों तक यह प्रयोग करने से एक चमत्कार घटित होता है | आप धीरे-धीरे सम्पन्नता कि और बढ़ने लगते है | वर्षभर नियमित रूप से इसका पाठ करने पर यह सिद्ध हो जाता है |

कनकधारा यन्त्र

यन्त्र में लिखे हुए कनकधारा मंत्र का जाप नित्य एक माला करने से प्रभाव बढ़ जाता है |


कनकधारा स्त्रोत

कनकधारा स्त्रोत का पाठ यन्त्र को देखते हुए करना है |


सावधानिया

सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण होने पर आपके द्वारा सिद्ध किये गए मंत्र व स्रोत को रिपीट कर लेना चाहिए इससे मंत्र व स्रोत का प्रभाव सदैव बना रहता है वरना ग्रहण के प्रभाव से सिद्ध किये हुए मंत्रो का प्रभाव कुछ कम होने लगता है |

कनकधारा स्त्रोत की रचना

कनकधारा स्रोत कि रचना अदि गुरु शंकराचार्य ने कि है | एक बार शंकराचार्य किसी ब्रम्हाणी के घर भिक्षां मांगने गए वह ब्रम्हाणी गरीब थी तथा उसके पास भिक्षां देने के लिए कुछ नहीं था उस ब्रम्हाणी के घर आंवले पड़े थे उसने वही शंकराचार्य को दिए | उस ब्रम्हाणी कि गरीबी देखकर शंकराचार्य कि आखो में आंसू आ गए उन्होंने दयाग्रह होकर करुणा में भरकर लक्ष्मी कि स्तुति कि जैसे ही उन्होंने स्तुति कि ब्रम्हाणी के घर सोने के आवलो कि वर्षा हुई |
आदिगुरु शंकराचार्य ने लक्ष्मी की स्तुति की वही कनकधारा स्रोत है यदि कोई भी कनकधारा स्रोत का नियमित पाठ करे तो उसकी गरीबी दूर हो जाती है धीरे-धीरे आर्थिक सम्पनता आने लगती है | स्त्रोत का पाठ पुरे मन से तन्मय होकर वाचिक रूप से करना है |

अनुभव

मेने कई लोगो को कनकधारा यन्त्र की साधना करवाई है तथा उसके परिणाम प्राप्त हुए है वह चमत्कारी है |
मेने कई लोगो को कनकधारा स्रोत का पाठ करते हुए धनवान बनते देखा है | यन्त्र को स्थापित कर इसके सामने जब कनकधारा स्रोत का पाठ किया जाता है तो चमत्कार घटित होता है | तुम्हारे मन में नए आईडिया आने लगते है तथा आर्थिक स्रोत के सारे रास्ते खुल जाते है |
यदि आप किसी समय बहुत अधिक आर्थिक मुसीबत में हो तो यन्त्र के सामने ग्यारह या इक्कीस बार कनकधारा स्रोत का पाठ करे जैसे ही आप पाठ कर उठेंगे तो चमत्कार घटित होने लगता है |
एक बार में आर्थिक परेशानी में था | मेने ग्यारह बार कनकधारा स्रोत का पाठ किया | पाठ करके जब में उठा तो मेने एक रिश्तेदार जिनको मेने पहले पैसे उधर दिए थे वह घर आ गए | कहने लगे की मेरे पास पैसे पड़े थे तो सोचा की आपका कर्ज चूका दू | तुरंत ऐसा चमत्कार देख कर मेरी श्रद्धा कनकधारा यन्त्र में बहुत बढ़ गयी |
आपको भी इस यन्त्र से फायदा हो तो मेरा आपसे निवेदन है की आप अपने परिचित या रिश्तेदार कोई भी आर्थिक रूप से कमजोर हो तो उन्हें ये यन्त्र व स्रोत बाटे ताकि सभी धनवान बन सके |

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