sant gyaneshwar in hindi

संत ज्ञानेश्वर की अद्भुत लीला (sant gyaneshwar in hindi)

आध्यात्मिक विचार

संत ज्ञानेश्वर की लीला-sant gyaneshwar in hindi sant gyaneshwar in hindi-चांगदेव नाम के एक हठयोगी थे इन्होंने योग सिद्धि से अनेको सिद्धियाँ प्राप्त कर रखी थी तथा मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कर ली थी उनकी उम्र 1400 वर्ष हो गई थी। चांगदेव को यश-प्रतिष्ठा का बहुत मोह था। वह अपने आप को सबसे महान […]

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Antar aatma in hindi

क्या परमात्मा हमसे पाप करवाता है ? (Antar aatma in hindi)

आध्यात्मिक विचार

क्या अंतर आत्मा में बैठा परमात्मा करवाता है पाप ?(Antar aatma in hindi) Antar aatma in hindi- महाभारत में दुर्योधन कहता है कि मैं धर्म को जानता हूं परन्तु मैं धर्म के अनुकुल जीवन नहीं जी सकता । मैं अधर्म को भी समझता हूं परन्तु पाप कर्म को छोड़ नहीं सकता। मेरे अंदर जो बैठा […]

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anahat naad jivandarshan

परमात्मा की आवाज “अनदह नाद” को कैसे सुने ? (Anahat naad)

अनहद नाद

अनहद नाद को कैसे सुने ?-anahat naad anahat naad-नाद को किसी भी अवस्था में अर्थात कुर्सी पर बैठकर, चलते-फिरते,पालथीमार बैठकर तथा सोते-सोते किसी भी स्थति में बैठकर इसे सुना जा सकता है परन्तु कुर्सी पर बैठकर , पालथीमार कर बैठ कर या किसी भी आसन में बैठकर जिसमें रीढ़ की हड्डी सीधी रहे सुनना अच्छा […]

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Anahat naad

अनहद नाद क्या है ?(Anahat naad in hindi)

अनहद नाद

अनहद नाद क्या है ? (what is anahat naad ? ) अनहद नाद को अनाहत ध्वनि या अनाहत नाद भी कहते है अनाहत ध्वनि को साधको ने एक हाथ से बजने वाली ताली कहां है तथा किसी भी आवाज को निकलने के लिए दो वस्तु को टकराना होता है इसे आहत ध्वनि कहतै है। अनाहत […]

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you are unique in hindi jivandarshan

you are unique in hindi- आप सबसे अलग है.. वो कैसे…….

पर्सनालिटी डेवलपमेंट

आप दुनियां से अलग है -you are unique in hindi you are unique in hindi – दोस्तों आपको हर बार किसी ना किसी से मिलने पर लगता होगा की शायद वो आपसे किसी मामले में ज्यादा है या कम है वैसे आमतौर पर आप उनसे ज्यादा होंगे पर उसकी किसी ना किसी बात पर आप […]

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you are sad in hindi by jivandarshan

कभी भी दुःखी हो तो चिंता ना करे..सुबह का इंतजार करे।you are sad in hindi

पर्सनालिटी डेवलपमेंट

कभी भी दुःखी हो तो चिंता ना करे..सुबह का इंतजार करे-you are sad in hindi you are sad in hindi-दोस्तों दुःख और तनाव भी हमारे जीवन का एक पार्ट है जो कहीं ना कही से हमारे पास बिन बुलाएं आ ही जाते है पर इनको रोकने के बहुत से उपाय भी होते है….. आज मैं […]

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hanuman chalisa meaning in hindi

हनुमान चालीसा का हिंदी अर्थ (hanuman chalisa meaning in hindi)

चालीसा/आरती

हनुमान चालीसा (hanuman chalisa meaning in hindi) दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। हिंदी अर्थ- श्री हनुमान जी! […]

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swami vivekananda thought

स्वामी विवेकानंद के जीवन के 5 प्रेरक प्रसंग जो आपकी ज़िन्दगी बदल देंगे (5 Prerak Prasang of Swami Vivekananda)

प्रेरक प्रसंग

5 Prerak Prasang of Swami Vivekananda :- भारतीय युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वो है स्वामी विवेकानंद। विवेकानंद एक ऐसा व्यक्तितत्व है, जो हर युवा के लिए एक आदर्श बन सकता है। उनकी कही एक भी बात पर यदि कोई अमल कर ले तो शायद उसे कभी जीवन में असफलता व हार […]

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अर्जुन रथ के पिछले भाग में क्यों चले गए ?

अध्याय प्रथम

अर्जुन रथ के पिछले भाग में क्यों चले गए ? अध्याय प्रथम का अंतिम श्लोक 47 सञ्जय उवाच एवमुक्त्वाऽर्जुनः संख्ये रथोपस्थ उपाविशत्। विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः।।47।। अर्थः-संजय बोले – युद्ध भूमि में शोक से उद्धिग्न मन वाले अर्जुन एस प्रकार कहकर,बाण सहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गये ।   तात्पर्यः-अर्जुन […]

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Shrimadbhagwadgita

क्या अर्जुन का युद्ध करने से मना करने का निर्णय सही था ?

अध्याय प्रथम

क्या अर्जुन का युद्ध करने से मना करने का निर्णय सही था ? श्लोक 45 से 46 अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्। यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः।।45।। अर्थः- हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गये है तथा राज्य सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिए तैयार है । यदि […]

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सनातन कुलधर्म तथा जाति धर्म क्या है ?

अध्याय प्रथम

सनातन कुलधर्म तथा जाति धर्म क्या है ? श्लोक 43 से 44 दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः। उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः।।43।। अर्थः- इन वर्णसंकर कारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुलधर्म और जातिधर्म नष्ट हो जाते है । उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन। नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम।।44।। अर्थः- हे जनार्दन जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित […]

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Pitro ki mukti ke liye kya kare jivandarshan

पितरों की मुक्ति के लिए क्या करे ?

अध्याय प्रथम

श्रीमद् भगवद्गीता अध्याय प्रथम श्लोक 41 से 42 पितरों की मुक्ति के लिए क्या करे ? अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः। स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः।।41।। अर्थः- हे कृष्ण पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती है तथा इससे वर्णसंकर संतान पैदा होती है सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च। पतन्ति पितरो ह्येषां […]

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