वास्तुशास्त्र

करोड़पति कैसे बने….?

आपकी दुकान नहीं चल रहीं है,फैक्टरी बंद पड़ी है, आय व धन लाभ के साधन नहीं है,आपको आर्डर नहीं मिल रहे है जो भी कार्य करते है उसमें हानि होती है, आप बीमारी से ग्रस्त है परिवार में अकारण लड़ाई झगड़े होते है,कोई न कोई कोर्ट में केस चलता रहता है,आपकी आर्थिक दशा खराब है।
इन सभी समस्याओं का कारण वास्तुदोष हो सकता है आज में वास्तुदोष दुर करने की ऐसी टिप्स बताऊंगा जिसमें आपको घर में तोड़ फोड़ नहीं करनी पड़ेगी तथा कम खर्च में आपका काम बन जाएगा। आय व धन आवक बढ़ने लगेगी तथा आप का भाग्योदय हो जायेगा तथा आप करोड़पति हो जायेंगे।
आपको फायदा होने पर इस लेख की लिंक अपने पहचान वालो,मित्रों व रिश्तेदारों को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि सभी को आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाने का पुण्य आपको भी प्राप्त हो। कोई चीज़ समझ में न आने पर बेबसाइट में लिखे फोन नम्बर पर आप मुझसे सम्पर्क कर समझ सकेंगे। मेरे इस लेख से आपकी आर्थिक समस्या दुर हो जायेगी ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।
पूर्व में एक लेख “दर्पण तो नहीं आपकी परेशानियों का कारण” में मैने बताया था की समतल दर्पण को किस दिशा में लगाना है तथा गलत दिशा में लगे दर्पण को हटा दे या दर्पण को ढंक दे। अर्थात उस पर वॉल पेपर लगा दे।

आज में इस लेख में बताऊंगा कि दर्पण को लगाकर आय व धन के साधन तथा सकारात्मक ऊर्जा कैसे प्राप्त करे। दर्पण खरीदने से पहले आप देख ले कि दर्पण के पीछे संतरी,लाल या महरून रंग का कोट तो नहीं चढ़ा है यदि ऐसा है तो यह दर्पण आप नहीं खरीदे क्योंकि ये दर्पण उत्तर-पूर्वी दीवार पर लगाने के लिए ठीक नहीं रहते है।
ऐसे दर्पण खरीदे जिसके पीछे आसमानी नीला,समुद्री नीला,हल्का नीला,हरा,सफेद,काला या क्रीम रंग का कोट हो। दर्पण वजन में हल्का तथा बड़ा हो इस बात का ध्यान रखे वजनी दर्पण उत्तर व पूर्व दिशा में लगाने के लिए ठीक नहीं रहता है।




उत्तर या पूर्वी दीवार(ईशानकोण) में दर्पण लगाने पर एक काल्पनिक प्रतिबिम्ब बनता है जिसमें यह दिशा बढ़ जाती है तथा गृह मुखिया की आय, धन लाभ,यश,मान व लोकप्रियता में वृद्धि होती है। दर्पण लगाते वक्त इस बात का ध्यान रखे कि उत्तरी या पूर्वी दीवार के कोने में दर्पण लगाना है यदि आपने पूर्वी दीवार को दक्षिण की ओर दर्पण लगा दिया या उत्तरी दीवार में पश्चिम की ओर दर्पण लगा दिया तो आपको लाभ नहीं होगा।

अत: उत्तरी व पूर्वी दीवार के कोनो पर दर्पण लगाना है। यदि प्लॉट में उत्तर-पूर्वी कोना कटा हुआ है तो दर्पण लगाकर इस भाग को बढ़ाया जा सकता है तथा ईशान कोण बढ़ने पर आय के साधन जो रूके हुए है वे खुल जायेगे। फर्श के उत्तरी-पूर्वी कोने पर दर्पण या चमकीला पत्थर लगाने पर दर्पण में जो प्रतिबिम्ब बनता है वह गहराई दिखाता है।
वास्तुशास्त्र बताता है कि उत्तर पूर्व भाग में पानी के अंडरग्राउण्ड टैंक होने पर लाभ होता है जब फर्श पर इस कोने में आप दर्पण लगायेंगे तो बिना तोड़फोड़ किये दर्पण फर्श में गहराई ले आता है जिससे आय व धन के स्त्रोत खुलते है तथा मातृपक्ष पैदा होने से धन आकर्षित होता है तथा आप अमीर हो जाते है।
वास्तुशास्त्र बताता है कि दक्षिण-पश्चिम(नेऋत्य कोण) में ऊंचाई लाभ देती है अत: छत पर इस कोण में जब आप उल्टा दर्पण लगायेंगे तो दर्पण के प्रतिबिम्ब से काल्पनिक ऊंचाई बढ़ जायेगी तथा आय के साधन बढ़ेगे।
यह नियम केवल ग्राउण्डफ्लोर के लिए है उपरी मंजिल पर इसका प्रयोग न करे अन्यथा हानि हो सकती है।

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