चाणक्य नीति

बर्बादी से बचाने वाली चाणक्य की इन बातों पर जरूर गौर करें…

• किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए. सीधे तने वाले पेड़ ही सबसे पहले काटे जाते हैं और बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं.
• अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोडऩा चाहिए. उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए.




• कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ साझा मत करो, यह प्रवृत्ति बर्बादी का कारण बन जाती है.
• दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर ही अंदर पनपने लगता है, खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि. मगर दिल में प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता. तो प्यार पनपे मगर कुछ समझदारी के साथ. संक्षेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखने वाले ही अंतत: सुखी रहते हैं.
• ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए.
• संकट काल के लिए धन बचाएं. परिवार पर संकट आए तो धन कुर्बान कर दें, लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दाव पर लगाकर करनी चाहिए.
• नीच प्रवृत्ति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुंचाने वाली, उनके विश्वासों को छलनी करने वाली बातें करते हैं, दूसरों की बुराई कर खुश हो जाते हैं. मगर ऐसे लोग अपनी बड़ी-बड़ी और झूठी बातों के बुने जाल में खुद भी फंस जाते हैं. जिस तरह से रेत के टीले को अपनी बांबी समझकर सांप घुस जाता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है, उसी तरह से ऐसे लोग भी अपनी बुराइयों के बोझ तले मर जाते हैं.

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