आध्यात्मिक विचारयन्त्र-मंत्र-तंत्र

नवरात्री में व्रत कैसे करें ?

शास्त्र कहता है कि हमें निराहार रहकर शक्ति की आराधना करनी चाहिए ।तथा फलाहार लेना चाहिए । यदि उपवास किया जाता है तो हमें शक्ति की निकटता प्राप्त होती है । भूख लगने पर फल खाने चाहिए।

यदि आपके लिए भूखा रहना संभव नहीं हो तो एक टाइम भोजन करें तथा भूख लगने पर फल खाए। भोजन करके तुरंत यदि साधना करने बैठोगे तो शरीर में आलस्य पैदा होगा अतः भोजन करने के 2 घंटे बाद साधना के लिए बैठना चाहिए।

अपने पुजा स्थल में घी की अखंड ज्योत जलानी चाहिए। शास्त्र कहते है कि हमें नित्य घी का हवन करना चाहिए। दीपक जलाना हवन ही है। यदि अखंड ज्योत करना संभव न हो तो जितनी देर साधना के लिए बैठे इतनी देर दीपक जलते रहना चाहिए। घी की ज्योत के स्थान पर तेल की ज्योत भी जला सकते है।

उपवास के साथ और क्या करें

प्रत्येक दिन हवन करना चाहिए यदि प्रत्येक दिन हवन संभव ना हो तो धूप जलाना चाहिए तथा धूप पूरे घर में घुमाना चाहिए इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है । गुग्गल का धूप श्रेष्ठ रहता है।

नवरात्री के प्रथम दिन घट स्थापना करनी चाहिए घड़े के ऊपर जो नारियल रखा जाता है उसे वर्ष भर पूजा स्थल में रखना चाहिए ।

नवरात्री में भूमि पर शयन करना चाहिए तथा ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए ।

जप करते वक्त तांबे के लौटे में जल भरकर रखना चाहिए तथा जप के पश्चात उस पानी को स्वयं पीना चाहिए व परिवार को पिलाना चाहिए । पानी की अपनी याददाश्त होती है जिससे पानी अपने अंदर मंत्र की शक्ति को समा लेता है तथा उसको पीने से नकारात्मकता दूर होती है व व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

नवरात्री में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए । यदि आपके लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना संभव नहीं हो तो नर्वाण मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चैं” का जप करना चाहिए इससे नवदुर्गा की कृपा आप पर बनी रहती है।

नवरात्री में आप अपने गुरु मंत्र का अनुष्ठान भी कर सकते है तथा अपने ईष्ट मंत्र का भी जप कर सकते है।

यदि आपको संस्कृत नहीं आती हो तो आप पंचोपचार पूजा मन से भी कर सकते है । देवी को नैवेघ व पुष्प चढ़ावे, तिलक लगावे धूप दीप जलावे।

यदि आप नवरात्री में मंत्रों को सिद्ध करना चाहे तो भी कर सकते है मंत्रों को सिद्ध करने के लिए आपको कुछ नियमों का पालन करना है । यदि मेरी बात मानोगे तो मंत्र जल्दी सिद्ध हो जाएंगे।

यदि गुरु के मुख से मंत्र लेते हो तो वह मंत्र जाग्रत होता है तथा उस मंत्र के साथ ही गुरू की शक्ति भी आप में प्रवेश करती है जिससे मंत्र जल्दी सिद्ध हो जाता है ।

मंत्र जप करने के लिए एक निश्चित समय पर प्रतिदिन बैठना चाहिए ।मंत्र जप पहले दिन जितनी संख्या में करें अन्य दिनों में भी उसी संख्या में करनी चाहिए।

मंत्र जप के लिए अपना आसन बिछाकर बैठना चाहिए तथा जप पूरा होने के बाद अपने आसन को समेट कर रख दे ताकि कोई अन्य उसका इस्तेमाल न कर सके।

मंत्र जप आप जिस माला से करते हो वह माला भी दूसरों को जप के लिए नहीं देनी चाहिए।

मंत्र जप करते वक्त ज्यादा हिलना डुलना नहीं चाहिए एक बार शरीर स्थिर हो जाए तो उसे स्थिर रखना है पैरो में तकलीफ होने पर धीरे से पैरो की मुद्रा परिवर्तित करें अर्थात मूर्ति की तरह बन जाना है।

दीपक पर  त्राटक करते हुए मंत्र जप किया जाए तो जल्दी सफलता मिलती है आँखों में पानी आने कि स्थिति में आँख को बंद कर आराम देने के पश्चात पुनः त्राटक करें जब हमारी पलक नहीं जप कती है तो ऊर्जा हममें प्रवेश करती है तथा जब हम पलक जपकाते है तो ऊर्जा बाहर जाती है।

जब 32 मिनट का त्राटक सिद्ध हो जाता है तो आपको भूत, भविष्य और वर्तमान दी झलक मिलनी प्रारम्भ हो जाएगी ।

यदि ज्योत सामने नहीं हो तथा त्राटक संभव नहीं हो तो अपनी नाभि पर दृष्टि डालते हुए मंत्र जप करना चाहिए इससे मंत्र जल्दी सिद्ध होते है।

मंत्र जितने जपते हो उसके दशांश का हवन करना चाहिये।

यदि आपने गुरु मंत्र नहीं ले रखा हो तो आप स्वयं पुस्तक से स्रोत तथा कवच का भी पाठ कर सकते है ।

अंतिम दिन हवन करने के पश्चात 9 कुंवारी कन्याओं को भोजन कराना चाहिये तथा उनकी पूजा करनी चाहिये अर्थात तिलक लगाकर उनका स्वागत करें व दक्षिणा दे । यदि कोरोना के कारण कन्याओं को भोजन कराना संभव नहीं है तो कन्याओं को फल बांटने चाहिये ।   

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