आध्यात्मिक विचारचालीसा/आरती

जानिए “ॐ जय जगदीश हरे आरती” के लिरिक्स (Om Jai Jagdish Hare Lyrics in hindi)

Om Jai Jagdish Hare Lyrics in hindi by jivandarshan

जानिए ॐ जय जगदीश हरे आरती को किसने व कब लिखा था (Aarti Lyrics in hindi)

सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे 150 सालों से यह आरती पूजा-अनुष्ठान का एक अभिन्न अंग बन चुकी है। इसे बनाया था पंडित श्रद्धाराम फुल्लौरी ने । 

यह आरती मूलतः भगवान विष्णु को समर्पित है फिर भी इस आरती को किसी भी पूजा, उत्सव पर गाया व सुनाया जाता हैं। कुछ भक्तों का मानना है कि इस आरती का मनन करने से सभी देवी-देवताओं की आरती का पुण्य मिल जाता है।


जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी
तुम बिन और दूजा,
तुम बिन और दूजा,
आस करूं मैं जिसकी
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ मां आद्या शक्ति आरती,अंबे मां आरती।Jay Adhya Shakti Aarti Lyrics in hindi

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वामी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥

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