आयुर्वेद विज्ञान

गर्मियों के मोसम में कैसा हो खान-पान ।(summer season in hindi)

summer season in hindi jivandarshan

ग्रीष्म ऋतु का आरम्भ होने जा रहा है। summer season in hindi

summer season in hindi-वर्तमान समय में ऋतुसंधि (वर्तमान समय का अंतिम सप्ताह व आने वाली ऋतु का प्रथम सप्ताह, इस समय को ऋतुसंधि कहते हैं) का काल चल रहा है।

यह सप्ताह वसंत ऋतु का अंतिम सप्ताह है व इस सप्ताह के बाद ग्रीष्म ऋतु का आरम्भ हो जायेगा।

* मौसम के रूप में यह ऐसा समय है जिसे लोग ज्यादा पसंद नहीं करते, वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन के कारण आजकल अधिकांश समय (कुछ महीनों को छोड़कर) वातावरण में गर्माहट बनी रहती है,

लेकिन ग्रीष्म ऋतु का समय अन्य ऋतुओं की अपेक्षा सबसे अधिक गर्म व शरीर के लिए कष्टभरा रहता है।

* इस गर्मी के मौसम में सूर्य अपनी तेज़ किरणों से वातावरण व मानव शरीर में मौजूद स्नेह तत्वों का अधिक मात्रा में ग्रहण (आदान) करने लगता है,

इस काल को आयुर्वेद में आदान काल भी कहा जाता है। जिससे शरीर में कफ का क्षय व वात की वृद्धि होने लगती है।

* आइये जानतें है कैसे कुछ सामान्य सी चीज़ों को अपनाकर इस गर्मी से बच सकते हैं:summer season in hindi

इस ऋतु में सुबह नहाने से पहले हल्के हाथों से शरीर पर नारियल का तेल अवश्य लगायें, अधिक व्यायाम / आसान न करें इससे शरीर में रूखापन और बढ़ता है।

* खाने में नमक (लवण), कड़वा (कटु) और खट्टा (अम्ल) रस से युक्त पदार्थों का बहुत ही कम मात्रा में या बिल्कुल सेवन न करें।

* गर्मी के मौसम में मीठे (मधुर), आसानी से पचने वाले (लघु), वसा युक्त (स्निग्ध), ठन्डे (शीतल) एवं तरल (द्रव) पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

जिन व्यक्तियों को डायबिटीज हो या अन्य मेटाबोलिक सम्बन्धी विकार हों ऐसे लोगों को मीठे व वसा युक्त पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

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* इस मौसम में ठन्डे जल से स्नान करना चाहिए,शरीर को तरावट व ताजगी भरा रखने के लिए स्नान के पानी मे गुलाब जल मिलाकर स्नान करें।

* शक्कर मिला जौ का सत्तू लेना चाहिए। इस मौसम में किसी भी रूप में मद्य (शराब) का सेवन न करें क्योंकि इस मौसम में ऐसा करने पर कृशता (कमजोरी), शरीर में गर्मी व मन में भ्रम उत्पन्न होता है।

* पुराने चावल, नारियल पानी, अनार, आमला, आम का पना (पानक), खश (उशीर)-गुलाब का शर्बत,

अधिक मात्रा में तरल पदार्थ, मौसमी फल जैसे अंगूर, आम, फालसा, तरबूज,आदि का रस, गुलकंद, दूध, घी, मठ्ठा आदि का सेवन करें।

* चाय-कॉफ़ी-कार्बोनेटेड पेय, तला-भुना-मिर्च-मसालेदार भोजन बिल्कुल न करें।

* हल्के सूती (कॉटन से बने) कपड़ों को पहने, इस मौसम में समय होने पर दिन के समय में थोड़ी देर सो सकते हैं।

सूर्य की सीधी किरणों से बचें, ऐसी स्थिति में बाहर निकलना आवश्यक हो तो शरीर को अच्छे से ढ़ककर व सूर्य की सीधी किरणों से बचने के लिए छाते का प्रयोग करें।

कपूर-चन्दन जैसे ठन्डे द्रव्यों को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर नहाने के समय शरीर पर लेप कर सकते हैं, इससे शरीर में बेहतर तरावट महसूस होती।

अगर आप ने किए ये उपाय तो मौसमी बीमारियाँ आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती।

वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में मौसमी तथा अन्य बीमारियों से बचाव के लिये स्वास्थ्य विभाग उज्जैन द्वारा सामयिक सलाह जारी की गई है।

आमजन को बताया गया है कि इस मौसम में बढ़ती धूप और लू से बचाव के लिये आवश्यक सावधानियां बरतें।

लू तापघात सभी उम्र के वर्ग में होने की संभावना रहती है, लेकिन वृद्धों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशु, युवा तथा क्रॉनिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों में इसकी संभावना अधिक होती है।

* वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में मौसमी तथा अन्य बीमारियों से बचाव के लिये सलाह है कि इस मौसम में बढ़ती धूप और लू से बचाव के लिये आवश्यक सावधानियां बरतें।

लू तापघात सभी उम्र के वर्ग में होने की संभावना रहती है, लेकिन वृद्धों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशु, युवा तथा क्रॉनिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों में इसकी संभावना अधिक होती है।

* गर्मी के दिनों में धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के ढीले कपड़ों का प्रयोग करें।

गर्दन के पिछले भाग, कान तथा सिर को गमछे या तोलिये से ढंककर ही धूप में निकलें, रंगीन चश्मे और छतरी का उपयोग करें। ज्यादा समय धूप में खड़े होकर व्यायाम, मेहनत या अन्य कार्य नहीं करें।

* ज्यादा भीड़, गरम घुटन कमरे, रेल, बस आदि की यात्रा अत्यावश्यक होने पर ही करें। आमजन को सलाह दी गई है कि घर से बाहर निकलते समय पहले भरपेट पानी अवश्य पियें।

धूप में जाते समय सूती कपड़े पहनें, सिर और कान को सूती कपड़े से ढंककर रखें। धूप में घूमने वाले व्यक्ति नमक-शकरयुक्त कोई तरल पदार्थ या ओआरएस घोल का सेवन करें।

नींबूपानी, आम का पना, शिकंजी या मट्ठा ज्यादा से ज्यादा लें। भरपेट भोजन करके ही बाहर निकलें, खाना ताजा हो। फल व सब्जियों का सेवन करें।

यथासंभव धूप में ज्यादा न निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें।

वैद्य रवीन्द्र गौतम मो. 9414752038
आयुर्वेद चिकित्साधिकारी
आयुर्वेद – विभाग ,राजस्थान – सरकार

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