चाणक्य नीति

चाणक्य नीति – अगर विद्यार्थी ध्यान रखे ये बाते तो उन्हे सफलता जरूर मिलेंगी…

अगर विद्यार्थी ध्यान रखे ये बाते तो उन्हे सफलता जरूर मिलेंगी…
कामवासना से बचे :-

जिस व्यक्ति के मन में काम वासना उत्पन्न हो जाती है, वह हर समय अशांत रहने लगता है। ऐसा व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सही-गलत कोई भी रास्ता अपना सकता है। कोई विद्यार्थी अगर काम वासना के चक्कर में पड़ जाए, तो वह पढ़ाई छोड़कर दूसरे कामों की ओर आकर्षित होने लगता है। उसका सारा ध्यान केवल अपनी काम वासना की पूर्ति की ओर लगने लगता है और वह पढ़ाई-लिखाई से बहुत दूर हो जाता है। इसलिए विद्यर्थियों को ऐसी भावनाओं के बचना चाहिए।
क्रोध तो बिलकुल ना रखे :-
क्रोध में आदमी अँधा हो जाता है, उसे सही गलत की पहचान नहीं रह जाती है, और जो व्यक्ति क्रोधी स्वभाव है और छोटी से छोटी बात पर भी गुस्सा होकर कुछ ऐसा कर बैठता है जिसके लिए आगे जाकर पछताना पड़े वैसे लोग क्रोध आने पर किसी का भी बुरा कर बैठते है।
ऐसे स्वभाव वाले व्यक्ति का मन कभी भी शांत नहीं रहता। विद्या प्राप्त करने के लिए मन का शांत और एकचित्त होना बहुत जरूरी होता है। अशांत मन से शिक्षा प्राप्त करने पर मनुष्य केवल उस ज्ञान को सुनता है, उसे समझ कर उसका पालन कभी नहीं कर पाता। इसलिए शिक्षा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी होता है।




किसी से भी लालच ना रखे:-
लालच बुरी बला है, हम सबने से सुना और पढ़ा है, लालची इंसान अपने फायदे के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और किसी के साथ भी धोखा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति सही-गलत के बारे में बिलकुल नहीं सोचते। जिस व्यक्ति के मन में दूसरों की वस्तु पाने या हक़ छीनने की भावना होती है और हमेशा उसे पाने की योजना बनाने में ही लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति कभी भी अपनी विद्या के बारे में सतर्क नहीं रह सकता और अपना सारा समय अपने लालच को पूरा करने में गंवा देता है। विद्यार्थी को कभी भी अपने मन में लोभ या लालच की भावना नहीं आने देना चाहिए।
अपनी जीभ पर कंट्रोल करे:-
जिस इंसान की जीभ उसके वश में नहीं होती, वह हमेशा ही स्वादिष्ठ व्यंजनों की खोज में लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति अन्य बातों को छोड़ कर केवल खाने को ही सबसे ज्यादा अहमियत देता है। कई बार स्वादिष्ठ व्यंजनों के चक्कर के मनुष्य अपने स्वास्थ तक के साथ समझौता कर बैठता है। विद्यार्थी को अपनी जीभ पर कंट्रोल रखनी चाहिए, ताकी वह अपने स्वास्थय और अपनी विद्या दोनों का ध्यान रख सके।
शरीर की सेवा में ना लगे:-
जिस विद्यार्थी का मन सजने – सवरने में लग जाता है वह अपना ज्यादातर समय इन्ही बातों में गवां देता है। ऐसे व्यक्ति खुद को हर वक्त सबसे सुन्दर और अलग दिखने के लिए ही मेहनत करते रहते हैं, और इसी वजह से हमेश उनके दिमाग में सौंदर्य, अच्छे पहनावे और रहन -सहन से जुडी बातें ही घुमती रहती हैं। सजने-सवरने के बारे में सोचने वाला व्यक्ति कभी भी एक जगह ध्यान केंद्रित करके विद्या नहीं प्राप्त कर पाता। विद्यार्थी को ऐसे परिस्थितियों से बचना चाहिए।
हंसी मजाक पर अपना वक्त खराब ना करे :-
किसी अच्छे विद्यार्थी का एक सबसे महत्वपूर्ण गुण होता है गंभीरता। विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में सफलता पाने के लिए इस गुण को अपनाना बहुत जरूरी होता है। जो विद्यार्थी अपना सारा समय हंसी-मजाक में व्यर्थ कर देता है, वह कभी सफलता नहीं प्राप्त कर पाता। विद्या प्राप्त करने के लिए मन का स्थित होना बहुत जरूरी होता है और हंसी-मजाक में लगा रहना वाला विद्यार्थी अपने मन को कभी स्थिर नहीं रख पाता।
ज्यादा नींद से बचे:-
अमूमन स्वस्थ मनुष्य के लिए 6-7 घंटे सोना आवश्यक होता है, विद्यार्थोयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वे आवश्यकता से अधिक निद्रा से बचें। अत्यधिक निद्रा से शरीर में हमेशा थकान बनी रहती है और अगर शरीर थका हो तो ध्यान केन्द्रित करना मुश्किल हो जाता है, और अध्ययन के लिए दिमाग का केन्द्रित होना अत्यंत आवश्यक होता है।

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