आनंद ध्यान अमृतसाधना

साधना.. अभिभावकों और बच्चों की (parents and child relationship in hindi)

parents and child relationship in hindi by jivandarshan

साथियों आज परिवार की साधना पर चर्चा करनी है…..अपनी और अपने बच्चो की बात करनी है…..आपसे इतना अनुरोध है की आप इस पोस्ट पर पूरा …ध्यान..दे …यह पोस्ट कई परिवारों के जीवन में रौशनी बिखेर देगी…..साथियों पिछले दिनों कई सवाल बच्चो से जुड़े आये और इनके समाधान मांगे…

सवालों की बानगी कुछ इस तरह की है ।

  • हमारा बच्चा पढने में कमजोर है ।
  • बच्चे का मन पढने में लगता ही नहीं है ।
  • पढता तो खूब है पर परीक्षा में सब गड़बड़ कर देता है ।
  • दिन भर दोस्तों से गपशप और मोबाइल में ही व्यस्त रहता है ।
  • छोटी कक्षा में ठीक था …दसवी बाद गड़बड़ हो गयी ।
  • बच्चा एकाकी सा रहता है…..किसी से बात करने तक से डरता है ।
  • छोटी छोटी बातो पर गुस्सा और चिडचिडा हो गया है ।
  • घर में एक दो बार छोटी चोरी भी कर दी है ।
  • स्कूल और कोलेज के आलावा कोचिग क्लास भी बंक करता है ।
  • अपनी पढाई को लेकर झूठ बोलता है ।
  • और गलती पकड में आने के बाद दो चार दिन तो ठीक पर बाद में पहले जैसा ही ।

कुछ इसी तरह के सवाल…..और अंत में अभिभावकों का कहना रहा की हम तो निराश हो चुके है….बच्चा हाथ से निकलता जा रहा है….क्या होगा उसका भविष्य….

साथियों आज इसी पर बात करनी है……अगर यह समस्या है तो इसका समाधान भी है….आज इसी समाधान की ….साधना….पर चर्चा करनी है….यह सम्पूर्ण साधना वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है……

बच्चे ने अभी अभी बाहरी दुनिया में कदम रखा है….बाहर की चमक-दमक इसके चेतन मन में बस गयी है…..और यह चेतन मन बाहर की रंगीन दुनिया ही देखता है….यही इसे पसंद है….हालाकि वो

पढ़ना भी चाहता है….पर बैठते ही मन उचट सा जाता है…..नतीजा कल तक जहा बेहतर परिणाम था वो अचानक बिगड़ गया…..

बस यही पर अभिभावक की भूमिका है…..पहला बार नतीजा ख़राब आते ही हम सब कुछ भूल कर बच्चे पर बरस जाते है…..आरोपों की झड़ी लगा देते है…..और यही वो समय होता है उसे प्यार से समझाने का …उसको समझने का….पर हम सब भूल कर उसे विलेन मान लेते है…..वो हमसे डर जाता है….और हमें भी विलेन मान लेता है…उसे घर के बजाय बाहर अच्छा लगता है…..वो पढता भी तो डर की वजह से कुछ याद नहीं रहता…..और धीरे धीरे सब गड़बड़ होता जाता है…..हम कहते है की हम तो उसके भले के लिए करते है…..हम डाट को सुधार मानते है…..हम अपने परिचितों के पढने वाले बच्चो की इससे तुलना करते है….पर क्या आपको पता है की हम ही अपने बच्चो का नुकसान कर रहे है…..

साथियों सच में यह सब हो रहा है तो अब सचेत हो जाये……बच्चो को बदलना है तो सबसे पहले खुद को बदलना होगा…..आध्यात्म विज्ञानं ही है…..यहाँ भी क्रिया की प्रतिक्रिया है….जो चाहते हो वो देना होगा…..

……साथियों बच्चे के भीतर यानि अवचेतन में पढाई का डर है….अपनों से डर है….बस इसे हटाकर अवचेतन में अपनों से प्यार, पढाई से प्यार, एक दूजे पर भरोसे के बीज रोपित करने है….आपके भीतर इन बीजो को खाद-पानी देने के अनुकूल वातावरण बनाना है……साथियों सच में आप इन सब से व्यथित है तो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ एक बार सम्पर्क करे…..सच में आप और आपका परिवार खुशियों से महक उठेगा……

आपसे इतना ही अनुरोध है की आप इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कराये……कई परिवारों का हम मिलकर भला करेगे……साथियों दो दिन के इस साधना में अभिभावक के साथ बच्चो को भी लाना होगा….ॐ गुरवे नमः

धन्यवाद

दिव्यराज दीपक

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